Archive for June 2008
दो शब्द
दो शब्द
मिला तुम्हारा साथ
है हाथों में हाथ
जज़बातों को बहकने दो
दो शब्द कहने दो।
निशाँ छोड़ते जा रहे कदम
साए साथ न देते सनम
मुझे यूँ ही साथ चलने दो
दो शब्द कहने दो।
जिन्दगी के झंझावात
कभी न छूटे साथ
गिरकर संभलने दो
दो शब्द कहने दो।
उम्र की ढलान पर
शाद और अवसाद पर
कसम पूरी करने दो
दो शब्द कहने दो।
पुष्पा कुमार “सुमान्या”
1 comment June 8, 2008